छठा सामूहिक विलोपन [Sixth Mass Extinction] [UPSC GS]

छठा सामूहिक विलोपन [Sixth Mass Extinction] [UPSC GS]

पिछले आधे अरब वर्षों में, पाँच बड़े पैमाने पर जैव विविधता की विलुप्तियाँ हुई हैं और पृथ्वी पर जीवन की विविधता अचानक और नाटकीय रूप से सिकुड़ गई हैं। दुनिया भर के वैज्ञानिक वर्तमान में छठा सामूहिक विलोपन [Sixth Mass Extinction] की निगरानी कर रहे हैं, जो कि क्षुद्रग्रह की टक्कर के बाद से सबसे विनाशकारी घटना होने की भविष्यवाणी है, जिसने डायनासोर का सफाया कर दिया था।

छठा सामूहिक विलोपन (Sixth Mass Extinction) क्या है ?

होलोसीन एक्सटिंक्शन या विलुप्ति (The Holocene extinction)

मानव गतिविधि के परिणामस्वरूप वर्तमान होलोसीन युग (जिसे हाल ही में कभी-कभी एंथ्रोपोसिन कहा जाता है) के दौरान प्रजातियों की एक विलुप्त होने की घटना है। इसे होलोसीन एक्सटिंक्शन या विलुप्ति (The Holocene extinction) भी कहा जाता है।

हाल के एक विश्लेषण के अनुसार, पृथ्वी पर वन्यजीवों का छठा सामूहिक विलोपन (Sixth Mass Extinction) तेज हो रहा है। भूमि पर जानवरों की 500 से अधिक प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं और 20 वर्षों के भीतर लुप्त होने की संभावना है, पिछले आंकड़ों के मुताबिक इतनी ही प्रजातियों के लुप्त होने में कई सौ वर्ष लगे थे लेकिन अब ये केवल 20 वर्ष में लुप्त होने के कगार पर है। दुनियाभर के वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि यह सभ्यता के पतन के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु हो सकता है।

छठा सामूहिक विलोपन [Sixth Mass Extinction] [UPSC GS]
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छठा सामूहिक विलोपन (Sixth Mass Extinction) का कारण क्या है ?

मानव प्रजाति का अनियंत्रित विकास इसका कारण है। इसके कारण प्रकृति में बहुत तेजी से नकारात्मक बदलाव आ रहे है जो मानव भविष्य के लिए बहुत खतरनाक हो सकते है। शोध का अनुमान है कि वर्ष 1500 के बाद से, पृथ्वी पहले ही अपनी 20 लाख ज्ञात प्रजातियों में से 7.5% – 13% के बीच खो चुकी है।

विवाद

मनोआ में हवाई विश्वविद्यालय के अध्ययन के प्रमुख लेखक रॉबर्ट कोवी ने कहा, “प्रजातियों के विलुप्त होने की दर में भारी वृद्धि और कई जानवरों और पौधों की आबादी में गिरावट अच्छी तरह से सबको ज्ञात है, फिर भी कुछ लोग इस बात से इनकार करते हैं कि ये घटनाएं बड़े पैमाने पर निरंतर चल रही है।”

विशेषज्ञों ने कहा कि, कई अभी भी यह स्वीकार नहीं करते हैं कि प्रजातियां छठे सामूहिक विलुप्त से तेजी से प्रभावित हो रही है। केवल स्तनधारियों और पक्षियों पर ध्यान केंद्रित काफी नहीं होगा जैसा की रेड लिस्ट से पता चलता है, अकशेरुकी जीवों (invertebrates) की मृत्यु दर की अनदेखी नहीं की जनि चाहिये जो ज्ञात प्रजातियों का लगभग 95 प्रतिशत है।

शोधकर्ताओं के अनुसार आईयूसीएन (IUCN) प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय लाल सूची का (Red List) उपयोग अपने रुख का समर्थन करने के लिए करते हैं, यह तर्क देते हुए कि प्रजातियों के नुकसान की दर पृष्ठभूमि दर से अलग नहीं है। हालांकि, लाल सूची भारी पक्षपातपूर्ण है । क्योंकि इसमें अधिकतर अकशेरुकी जीव (invertebrates) शामिल नहीं है।

इस प्रकार लाल सूची में विलुप्ति का मूल्यांकन अनुमान से काफी कम हैं और विलुप्त होने के वास्तविक स्तर का अनुमान लगाने के लिए अनुपयुक्त हैं।

जबकि कुछ विशेषज्ञों के अनुसार यह छठा सामूहिक विलोपन (Sixth Mass Extinction) एक प्राकृतिक प्रक्षेपवक्र अर्थात भौतिक घटना है है और मनुष्य पृथ्वी पर अपनी भूमिका निभाने वाली एक और प्रजाति है, शोधकर्ताओं ने तर्क दिया कि मनुष्य ही एकमात्र ऐसी प्रजाति है जिसके पास ग्रह के भविष्य के बारे में सचेत विकल्प है।

लेकिन संकट को नकारना, इसके बारे में कुछ नहीं करना या इसे गले लगाना और कुछ लोगों के लाभ के लिए इसमें हेरफेर करना, निस्संदेह राजनेताओं और व्यावसायिक हितों द्वारा परिभाषित है, नैतिक जिम्मेदारी का हनन है।

यह आर्टिकल आधिकारिक स्त्रोत जैसे प्रमाणित पुस्तके, विशेषज्ञ नोट्स आदि से बनाया गया है। निश्चित रूप से यह सिविल सेवा परीक्षाओ और अन्य परीक्षाओ के लिए उपयोगी है।



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