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आईयूसीएन (अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ) [IUCN kya hai] -UPSC-GK [hindi]

आईयूसीएन (अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ-IUCN) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो संधारणीय विकास के लिए काम करता है। यह संगठन विश्वभर में फैले पारितंत्रों के बचाव जिसमे वनस्पति और जंगली जीव जंतु है, के लिए काम करता है।

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अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ विभिन्न जीवों के संरक्षण के लिए प्रयासरत रहा है जिसमे पारितंत्र और विकास में तालमेल बैठाना और उन जीवों की लिस्ट तैयार करना जिनका अस्तित्व संकट में है या निकट भविष्य में आ सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) क्या है

यह एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो विश्वभर में फैले पारितंत्र और जंगली जीवों का संरक्षण करने में मदद करता है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ में कई निजी और सरकारी संगठन मिल कर काम करते है और इसके सदस्य भी है। यह रेड डाटा लिस्ट तैयार करता है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) मुख्यालय

ग्लैंड, स्विट्जरलैंड (Gland, Switzerland) में इसका मुख्यालय है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) कब स्थापित हुआ

आईयूसीएन की स्थापना 5 अक्टूबर 1948 को हुई थी, लेकिन तब इसका नाम IUPN (International Union for the Protection of Nature) था।

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) में कितने सदस्य है

IUCN एक सदस्यता संघ है जो सरकार और नागरिक समाज दोनों संगठनों से बना है। इसमें अभी 1400 से अधिक निजी और सरकारी सदस्य है। इसके साथ साथ 18000 से अधिक वैज्ञानिक विशेषज्ञ भी मौजूद है। इस विशेषज्ञता के कारण यह दुनियाभर के देशों को काफी मूल्यवान जानकारी उपलब्ध करवाता है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) का इतिहास और उपलब्धियां

इसका इतिहास को निम्न टाइमलाइन पर समझ सकते है:

IUPN की स्थापना

IUCN की स्थापना 5 अक्टूबर 1948 को फ़ॉनटेनब्लियू, फ़्रांस में हुई थी, जब यूनेस्को द्वारा लिए गए इनिशिएटिव के कारण सरकारों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (IUPN) का गठन करने वाले एक औपचारिक अधिनियम पर हस्ताक्षर किए थे। नए संगठन को स्थापित करने की पहल यूनेस्को और विशेष रूप से इसके पहले महानिदेशक, ब्रिटिश जीवविज्ञानी जूलियन हक्सले से हुई।

1956: इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर एंड नेचुरल रिसोर्सेज

आईयूपीएन (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर) ब्रसेल्स में 65 सदस्यों के साथ शुरू हुआ और यूनेस्को से निकटता से जुड़ा था। उन्होंने संयुक्त रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के नेचर लेक सक्सेस के संरक्षण पर 1949 के सम्मेलन का आयोजन किया और गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों की पहली सूची का मसौदा तैयार किया। अपने अस्तित्व के प्रारंभिक वर्षों में आईयूसीएन लगभग पूरी तरह से यूनेस्को के वित्त पोषण पर निर्भर था ।

आईयूपीएन प्रमुख वैज्ञानिकों को शामिल करने और वन्यजीवों पर कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान करने में सफल रहा था लेकिन इसके द्वारा विकसित किए गए कई विचारों को लागु नहीं किया गया। इसका कारण विभिन्न देशों की सरकारों की ओर से कार्रवाई करने की अनिच्छा, अनिश्चितता और संसाधनों की कमी के कारण हुआ । 1956 में, IUPN ने अपना नाम बदलकर इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर एंड नेचुरल रिसोर्सेज कर दिया गया।

1956–1965: अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाना

इस समय काल में उसने अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाना शुरू किया। इसने संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेंसियो, युरोपियन यूनियन से सम्बन्ध बढ़ाना शुरू किये। 1964 में पहली रेड डाटा लिस्ट को प्रकाशित किया गया और अफ्रीका में पारितंत्र संकट पर फोकस किया गया।

1966–1975 : अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण आंदोलन के रूप में उभारना

1960 के दशक के दौरान, IUCN ने गैर सरकारी संगठनों के लिए एक नया दर्जा प्रदान करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पैरवी की। इस प्रयास के कारण 1968 में UNGA ने संकल्प-1296 (Resolution 1296) को अपनाया जो गैर सरकारी संगठनों को ‘परामर्शदाता (consultative)’ का दर्जा प्रदान करता है। IUCN को अंततः संयुक्त राष्ट्र के छह संगठनों से मान्यता मिली।

IUCN कुछ पर्यावरण संगठनों में से एक था जो औपचारिक रूप से मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (स्टॉकहोम, 1972) की तैयारी में शामिल था।

1980 : विश्व संरक्षण रणनीति

आईयूसीएन ने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और वर्ल्ड वाइड फंड (WWF for Nature) के साथ मिलकर विश्व संरक्षण रणनीति (World Conservation Strategy) प्रकाशित करने के लिए यूनेस्को के साथ सहयोग किया

2003: जैव विविधता के साथ संतुलन

व्यवसाय और जैव विविधता कार्यक्रम की स्थापना

2008: आधिकारिक नामकरण

2008: वर्ल्ड कंजर्वेशन यूनियन को अपने आधिकारिक नाम के रूप में इस्तेमाल करना बंद कर दिया और इसका नाम इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) कर दिया गया

IUCN कैसे काम करता है

यह निम्न तरीके से काम करता है:

  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ कांग्रेस (IUCN Congress): जहा प्रत्येक 4 वर्ष में सदस्य इकठ्ठा हो कर एजेंडा बनाते है
  • आईयूसीएन परिषद (IUCN Council): IUCN परिषद प्रमुख निकाय है। आईयूसीएन सदस्य आयोग के अध्यक्षों और सदस्य संगठनों के प्रतिनिधियों को परिषद में चार साल के कार्यकाल के लिए चुनते हैं।
  • सदस्यता: सदस्य वैश्विक रूप से अपनी आवाज़ उठाते है जो न केवल सरकारों को बल्कि अंतर्राष्ट्रीय नीतियों को भी प्रभावित करती है।
  • कमिशन्स (Commissions) : इसमें 6 आयोग है जो अपने क्षेत्राधिकारों पर काम करते है (Link)
  • सचिवालय (Secretariat): IUCN सचिवालय प्रमुख विषयों पर अपने काम पर ध्यान केंद्रित करता है और स्थानीय स्तर पर अपने ज्ञान को बेहतर बनाने और सदस्यों की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए 11 परिचालन क्षेत्रों में संगठित है।

IUCN का काम करने का क्षेत्र

वैसे यह वैश्विक रूप में काम करता है फिर भी इसने 11 क्षेत्रों में अपने परिचालन केंद्र बनाये है :

  • एशिया (Asia)
  • पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका (Eastern and Southern Africa)
  • पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया (Eastern Europe and Central Asia)
  • यूरोप (Europe)
  • भूमध्यसागरीय (Mediterranean)
  • मैक्सिको (Mexico)
  • मध्य अमेरिका और कैरिबियन (Central America and the Caribbean)
  • ओशिनिया (Oceania)
  • दक्षिण अमेरिका (South America)
  • वाशिंगटन डीसी कार्यालय (Washington D.C. Office)
  • पश्चिम और मध्य अफ्रीका (West and Central Africa)
  • पश्चिम एशिया (West Asia)

विश्व संरक्षण कांग्रेस (World Conservation Congress) क्या है

यह IUCN की सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय है। हर चार साल में एक बार आयोजित, आईयूसीएन विश्व संरक्षण कांग्रेस पर्यावरण के संरक्षण और वैश्विक चुनौतियों के लिए प्रकृति की पेशकश के समाधान प्रस्तावित करती है। यह नागरिक समाज, लोगों, व्यापार और शिक्षाविदों, कई हजार नेताओं और निर्णय निर्माताओं को एक साथ लाती है।

आईयूसीएन लाल सूची (IUCN Red List)

यह एक ऐसी सूची है जो देशों को चेतावनी स्वरूप यहाँ बताती है की कोई स्थानीय पौधा या प्रजाति या जंगली जानवर का अस्तित्वसंकटग्रस्त है या होने वाला है। पहली बार यह सूची 1964 में प्रकाशित की गयी थी। इसमें 9 श्रेणियाँ है , जो की निम्न है:

iucn
आईयूसीएन
श्रेणीसंक्षिप्त
विलुप्त (EX-Extinct)जो अब बिलकुल नहीं बचे है अर्थात विलुप्त हो चुके है
वन-विलुप्त (EW-Extinct in the Wild)जो जंगलों से पूरी तरह खत्म हो चुके है लेकिन कुछ चिड़ियाघरों या अन्य संरक्षण स्थलों पर संरक्षित है
घोर-संकटग्रस्त (CR-Critically Endangered)जंगलों से विलुप्त होने का घोर ख़तरा बना हुआ है
संकटग्रस्त (EN-Endangered)जंगलों से विलुप्त होने का ख़तरा है
असुरक्षित (VU-Vulnerable)जंगलों में संकटग्रस्त हो जाने की संभावना है
संकट-निकट (NT-Near Threatened)भविष्य में संकटग्रस्त हो जाने की संभावना है
संकटमुक्त (LC-Least Concern)बहुत कम ख़तरा – बड़ी तादाद और विस्तृत क्षेत्र में पाई जाने वाली जाति
आंकड़ों का अभाव (DD-Data Deficient)आंकड़ों की कमी से उसकी संरक्षण स्थिति और संकट का अनुमान नहीं लगाया जा सकता
अनाकलित (NE-Not Evaluated) संरक्षण मानदंड पर आँकन अभी नहीं किया गया है

यह आर्टिकल आधिकारिक स्त्रोत जैसे प्रमाणित पुस्तके, विशेषज्ञ नोट्स आदि से बनाया गया है। निश्चित रूप से यह सिविल सेवा परीक्षाओ और अन्य परीक्षाओ के लिए उपयोगी है।


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About the author

Ankita is German Scholar and UPSC Civil Services exams aspirant. She is a blogger too. you can connect her to Instagram or other social Platform.

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