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शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organization)-SCO kya hai [UPSC GK]

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक स्थायी अंतरसरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO – Shanghai Cooperation Organization) की शुरुआत एक सामरिक संगठन के रूप में शुरू हुई थी जिसने बाद में एक बहुव्यापिक उद्देश्यों वाला रूप ले लिया। अब शंघाई सहयोग संगठन के काफी लक्ष्य है जिसमे सामरिक सहयोग से लेकर आर्थिक और संधारणीय विकास के मुद्दे भी शामिल है। अब यह विश्व का एक महत्वपूर्ण संगठन है जिसे विकसित देश भी नज़रअंदाज़ नहीं कर पा रहे है।

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2001 में अपनी स्थापना के बाद से, एससीओ ने मुख्य रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों, क्षेत्रीय आतंकवाद, जातीय अलगाववाद और धार्मिक उग्रवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई पर ध्यान केंद्रित किया है। SCO की प्राथमिकताओं में क्षेत्रीय विकास भी शामिल है।

शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organization)-SCO kya hai

शंघाई सहयोग संगठन का इतिहास

इसका इतिहास चीन की सुरक्षा नीति और मध्य एशिया के नए आज़ाद हुए देशों के सीमा तनावों के इर्द गिर्द घूमता है।

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक 8 सदस्यीय बहुपक्षीय संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून 2001 को शंघाई, चीन में चीन, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के नेताओं द्वारा की गई थी। उज्बेकिस्तान को छोड़कर, ये देश शंघाई फाइव ग्रुप के सदस्य थे, जिसका गठन 26 अप्रैल 1996 को सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य विश्वास को गहरा करने की संधि पर हस्ताक्षर के साथ किया गया था।

2001 में, शंघाई में वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान, पांच सदस्य देशों ने पहली बार उज्बेकिस्तान को शंघाई फाइव मैकेनिज्म (Shanghai Five Mechanism) में शामिल किया (इस प्रकार इसे शंघाई सिक्स में बदल दिया)।

इसके बाद, 15 जून 2001 को शंघाई सहयोग संगठन की घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए और जून 2002 में एससीओ सदस्य राज्यों के प्रमुखों ने एससीओ चार्टर पर हस्ताक्षर किए, जो संगठन के उद्देश्यों, सिद्धांतों, संरचनाओं और संचालन के रूपों पर व्याख्या करता है

जुलाई 2005 में अस्ताना शिखर सम्मेलन में, भारत, ईरान और पाकिस्तान को पर्यवेक्षक का दर्जा दिया गया था। जुलाई 2015 में रूस के ऊफ़ा में, SCO ने भारत और पाकिस्तान को पूर्ण सदस्य के रूप में स्वीकार करने का निर्णय लिया। भारत और पाकिस्तान ने हस्ताक्षर किए

जून 2016 में ताशकंद, उज्बेकिस्तान में दायित्वों का ज्ञापन (memorandum of obligations), जिससे पूर्ण सदस्यों के रूप में एससीओ में शामिल होने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हुई। 9 जून 2017 को अस्ताना में ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन, भारत और पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर पूर्ण सदस्य के रूप में एससीओ में शामिल हो गए।

इसका काल क्रम निम्न है :

April 26, 1996

शंघाई-5 (Shanghai Five) का गठन

शंघाई-5, 26 अप्रैल 1996 को चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान द्वारा शंघाई में सीमावर्ती क्षेत्रों के सैन्य विश्वास को गहरा करने के लिए बनाया गया था।

April 26, 1996
April 24, 1997

सीमाओं पर सेना कम करना

24 अप्रैल, 1997 को उन्हीं देशों ने मास्को में एक बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य बलों में कमी पर संधि पर हस्ताक्षर किए। 20 मई 1997 को, रूसी राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन और चीनी नेता जियांग जेमिन ने “बहुध्रुवीय दुनिया” पर एक घोषणा पर हस्ताक्षर किए।

April 24, 1997
June 15, 2001

शंघाई सहयोग संगठन का गठन

2001 में, वार्षिक शिखर सम्मेलन शंघाई में हुआ। वहां पांच सदस्य देशों ने पहले उज्बेकिस्तान को शंघाई फाइव मैकेनिज्म (Shanghai Five mechanism) में शामिल किया (इस प्रकार इसे शंघाई-6 में बदल दिया)। फिर सभी छह राष्ट्राध्यक्षों ने 15 जून 2001 को शंघाई सहयोग संगठन की घोषणा पर हस्ताक्षर किए

June 15, 2001
July 7, 2002

शंघाई सहयोग संगठन का चार्टर (SCO Charter)

एससीओ सदस्य देशों के प्रमुख रूस के सेंट पीटर्सबर्ग एससीओ चार्टर पर हस्ताक्षर किए, जो संगठन के उद्देश्यों, सिद्धांतों, संरचनाओं और संचालन के रूपों पर व्याख्या करता है

July 7, 2002
July 5, 2005

भारत, ईरान और पाकिस्तान को पर्यवेक्षक का दर्जा

जुलाई 2005 में अस्ताना शिखर सम्मेलन में, भारत, ईरान और पाकिस्तान को पर्यवेक्षक का दर्जा दिया गया

July 5, 2005
July 9, 2015

भारत और पाकिस्तान को पूर्ण सदस्यता का निर्णय

जुलाई 2015 में रूस के ऊफ़ा में, SCO ने भारत और पाकिस्तान को पूर्ण सदस्य के रूप में स्वीकार करने का निर्णय लिया गया

July 9, 2015
June 23, 2019

भारत और पाकिस्तान द्वारा हस्ताक्षर

ताशकंद में भारत और पाकिस्तान द्वारा SCO के दायित्व पत्रों पर हस्ताक्षर किया गया और पूर्ण सदस्य्ता की औपचारिक शुरुआत हुई

June 23, 2019
June 9, 2017

भारत और पाकिस्तान को पूर्ण सदस्यता

9 जून 2017 की ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान की पूर्ण सदस्य के रूप में औपचारिक शुरुआत हुई

June 9, 2017

शंघाई सहयोग संगठन में कितने सदस्य है

शंघाई सहयोग संगठन में पूर्ण सदस्य, पर्यवेक्षक सदस्य और डायलॉग पार्टनर है , जो की निम्न है (जनवरी 2022 तक)

  • पूर्ण सदस्य: SCO में वर्तमान में 8 सदस्य देश पूर्ण सदस्य, (चीन, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान) शामिल हैं।
  • पर्यवेक्षक सदस्य: 4 पर्यवेक्षक देश है जो पूर्ण सदस्यता में शामिल होने में रुचि रखते हैं (अफगानिस्तान, बेलारूस, ईरान और मंगोलिया)
  • डायलॉग पार्टनर: 6 “डायलॉग पार्टनर्स” (आर्मेनिया, अजरबैजान, कंबोडिया, नेपाल, श्रीलंका और तुर्की)
शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organization)-SCO kya hai

शंघाई सहयोग संगठन और संयुक्त राष्ट्र संघ का संबंध

एससीओ (SCO) 2005 से संयुक्त राष्ट्र महासभा में पर्यवेक्षक रहा है। अप्रैल 2010 में, संयुक्त राष्ट्र और एससीओ सचिवालयों ने सहयोग के लिए एक संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए। एससीओ सचिवालय ने संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO), विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) और अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के साथ साझेदारी भी स्थापित की है।

इसके साथ साथ ड्रग्स और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNODC), एशिया और प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) और आतंकवाद विरोधी संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNOCT) के साथ भी सहयोग कर रहा है।

राजनीतिक और शांति निर्माण मामलों के विभाग (DPPA), साथ ही UNRCCA (मध्य एशिया के लिए निवारक कूटनीति के लिए संयुक्त राष्ट्र केंद्र) SCO अधिकारियों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखते हैं और सुरक्षा विकास और आतंकवाद का मुकाबला करने और हिंसक उग्रवाद की रोकथाम से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित रहे है। 2017 से, DPPA ने बीजिंग में SCO में एक संपर्क अधिकारी को तैनात किया है।

शंघाई सहयोग संगठन के लक्ष्य क्या है ?

एससीओ के मुख्य लक्ष्य इस प्रकार हैं:

  • सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास और पड़ोसी को मजबूत करना
  • राजनीति, व्यापार, अर्थव्यवस्था, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और संस्कृति के साथ-साथ शिक्षा, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और अन्य क्षेत्रों में उनके प्रभावी सहयोग को बढ़ावा देना
  • क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने और सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त प्रयास करना
  • एक लोकतांत्रिक, निष्पक्ष और तर्कसंगत नई अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था की स्थापना की ओर काम करना

शंघाई सहयोग संगठन का औपचारिक ढांचा

SCO के दो स्थायी निकाय हैं –

  • बीजिंग में स्थित एससीओ सचिवालय, और
  • ताशकंद में स्थित क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (RATS) की कार्यकारी समिति।

एससीओ महासचिव और एससीओ आरएटीएस (SCO RATS) की कार्यकारी समिति के निदेशक को तीन साल की अवधि के लिए देशों के प्रमुखों की परिषद द्वारा नियुक्त किया जाता है।

व्लादिमीर नोरोव (उज्बेकिस्तान) और जुमाखोन गियोसोव (ताजिकिस्तान) ने 1 जनवरी 2019 से क्रमशः इन पदों पर कार्य किया है।

शंघाई भावना (Shanghai Spirit) क्या है

शंघाई भावना (Shanghai Spirit)” एससीओ सदस्यों के बीच आपसी विश्वास, पारस्परिक लाभ, समानता, परामर्श, सांस्कृतिक विविधता के लिए सम्मान और सामान्य विकास की खोज के बारे में है। शंघाई स्पिरिट (Shanghai Spirit) को और विस्तार देते हुए, एससीओ नीति गुटनिरपेक्षता के सिद्धांत, किसी तीसरे देश को लक्ष्य न बनाना और खुलापन पर भी चलने की एक सामूहिक भावना है।

शंघाई सहयोग संगठन में निर्णय कौन करता है ?

राज्यों के प्रमुखों की परिषद (Council of Heads of States) एससीओ में शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था है। यह परिषद एससीओ शिखर सम्मेलन सदस्य देशों की राजधानी शहर में मिलती है, जो प्रत्येक वर्ष आयोजित की जाती है।

शंघाई सहयोग संगठन और भारत

शंघाई सहयोग संगठन भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। 2005 में पर्यवेक्षक का दर्जा पाने के भारत को 2017 में पूर्ण सदस्य बनने का मौका मिला। भारत को निम्न लाभ है :

  • भारत मध्य एशिया में ऊर्जा सुरक्षा के लाभ
  • अफगानिस्तान और मध्य एशिया के क्षेत्रीय आतंकवाद से निपटने के लिए
  • मध्य एशिया के साथ साथ यूरोप तक व्यापार तक विस्तार में मदद करता है
  • चीन और रूस जैसे बड़े देशों के साथ रहकर उनकी विदेश नीति को प्रभावित करना जिसमे कश्मीर समस्या पर संतुलन बैठना भी शामिल है

शंघाई सहयोग संगठन में भारत की सक्रियता

जुलाई 2005 में अस्ताना शिखर सम्मेलन में भारत को पर्यवेक्षक का दर्जा दिया गया था और उसके बाद में भारत ने पर्यवेक्षकों के लिए खुले सभी एससीओ मंचों में भाग लिया। भारत ने सितंबर 2014 में दुशांबे में एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले, औपचारिक रूप से तत्कालीन एससीओ अध्यक्ष, ताजिकिस्तान को पूर्ण सदस्यता के लिए एक आवेदन प्रस्तुत किया था। उसके बाद, जुलाई 2015 में ऊफ़ा (रूस) एससीओ शिखर सम्मेलन में भारत (और पाकिस्तान के) को पूर्ण सदस्य के प्रवेश की प्रक्रिया की शुरुआत की घोषणा की थी

9 जून 2017 से एक पूर्ण सदस्य के रूप में एससीओ में भारत का प्रवेश हुआ और विदेश मंत्रालय में एससीओ डिवीजन की स्थापना और एससीओ के लिए राष्ट्रीय समन्वयक और स्थायी प्रतिनिधि की नियुक्ति की गयी, तब से अब तक यह नियमित है।

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की परिषद की अध्यक्षता कब की थी ?

30 नवंबर 2020 को परिषद की वर्चुअल बैठक हुई जो ये SCO के शासनाध्यक्षों की 19वीं बैठक थी। इसमें भारत ने अध्यक्षता की थी।

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में भारत के प्रयास

2005 से भारत पर्यवेक्षक के रूप में भारत ने शंघाई सहयोग संगठन में भूमिका निभानी शुरू कर दी थी लेकिन पूर्ण सदस्य बनने के बाद भारत औपचारिक रूप से सक्रीय रहा है, जो की निम्न है :

  • कोविड महामारी के दौरान आर्थिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध बढ़ाने के लिए काफी कार्यक्रम आयोजित किये
  • विज्ञान एवं तकनीकी, स्टार्टअप और इनोवेशन और पारंपरिक औषधि विज्ञान पर सहयोग जिसमे 2020 में युवा वैज्ञानिको का वर्चुअल कॉन्क्लेव आयोजित किया गया।
  • व्यापारिक रिश्ते मजबूत करने के लिए स्टार्ट अप फोरम, बिज़नेस कॉनक्लेव आदि गतिविधियाँ करना

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (देश) कौन है ?

चीन इस ग्रुप में सबसे प्रभावशाली देश है। यह जीडीपी, जनसँख्या और सामरिक दृष्टि से सबसे बड़ा है।

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के बीच तुलनात्मक फैक्ट्स

शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organization)-SCO kya hai

यह आर्टिकल आधिकारिक स्त्रोत जैसे प्रमाणित पुस्तके, विशेषज्ञ नोट्स आदि से बनाया गया है। निश्चित रूप से यह सिविल सेवा परीक्षाओ और अन्य परीक्षाओ के लिए उपयोगी है।


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About the author

Ankita is German Scholar and UPSC Civil Services exams aspirant. She is a blogger too. you can connect her to Instagram or other social Platform.

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