एस-400 ट्रिम्फ (S-400 Triumf) एक विमान भेदी हथियार, एस-300 परिवार का नवीनीकरण के रूप में, रूस की अल्माज़ केंद्रीय डिजाइन ब्यूरो द्वारा 1990 के दशक में विकसित विमान भेदी हथियार प्रणाली है। यह 2007 के बाद से ही रूसी सशस्त्र सेना में सेवा कर रही है। S400 मिसाइस सिस्टम दुनिया का सबसे खतरनाक हथियार माना जाता है

एस-400 की विशेषता

  • यह सिस्टम देश में होने वाले किसी भी संभावित हवाई हमले का पता लगाएगा। सिस्‍टम अत्‍या‍धुनिक रडारों से लैस है। उपग्रहों की जरिए यह दुश्‍मनों की तमाम जानकारी जुटाता है। इसके आधार पर यह बताया जा सकता है कि लड़ाकू विमान कहां से हमला कर सकते हैं
  • इसके अलावा यह एंटी-मिसाइल दागकर दुश्मन विमानों और मिसाइलों को हवा में ही खत्म कर सकता है। यह है कि 400 किमी के दायरे में आने वाले किसी भी खतरे को खत्म कर सकता है। फिर खतरा चाहे लड़ाकू विमान हो, ड्रोन हो या मिसाइल हो। यह सभी का लक्ष्‍य भेदने में सक्षम है।
  • एस-400 के रडार 100 से 300 टारगेट ट्रैक कर सकते हैं। 600 किमी तक की रेंज में ट्रैकिंग कर सकता है। इसमें लगी मिसाइलें 30 किमी ऊंचाई और 400 किमी की दूरी में किसी भी टारगेट को भेद सकती हैं। ज़मीनी ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
  • सबसे तगड़ी चीज़ यह कि एक ही समय में यह 400 किमी तक 36 टारगेट को एक साथ मार सकती है। इसमें 12 लॉन्चर होते हैं, यह तीन मिसाइल एक साथ दाग सकता है और इसे तैनात करने में पांच मिनट लगते हैं।
  • इसमें चार तरह की मिसाइल होती हैं। एक मिसाइल 400 किमी की रेंज वाली होती है, दूसरी 250 किमी, तीसरी 120 और चौथी 40 किमी की रेंज वाली होती है।
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कितना खतरनाक है S-400 मिसाइल सिस्टम

इस मिसाइल सिस्टम का पूरा नाम S-400 ट्रायम्फ है जिसे नाटो देशों में SA-21 ग्रोलर के नाम से पुकारा जाता है. यह लंबी दूरी का जमीन से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है जिसे रूस ने बनाया है| S-400 का सबसे पहले साल 2007 में उपयोग हुआ था जो कि S-300 का अपडेटेड वर्जन है|

साल 2015 से भारत-रूस में इस मिसाइल सिस्टम की डील को लेकर बात चल रही है. कई देश रूस से यह सिस्टम खरीदना चाहते हैं क्योंकि इसे अमेरिका के थाड (टर्मिनल हाई ऑल्टिट्यूड एरिया डिफेंस) सिस्टम से बेहतर माना जाता है |

इस एक मिसाइल सिस्टम में कई सिस्टम एकसाथ लगे होने के कारण इसकी सामरिक क्षमता काफी मजबूत मानी जाती है. अलग-अलग काम करने वाले कई राडार, खुद निशाने को चिन्हित करने वाले एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम, लॉन्चर, कमांड और कंट्रोल सेंटर एक साथ होने के कारण S-400 की दुनिया में काफी मांग है.

इसकी मारक क्षमता अचूक है क्योंकि यह एक साथ तीन दिशाओं में मिसाइल दाग सकता है |400 किमी के रेंज में एक साथ कई लड़ाकू विमान, बैलिस्टिक व क्रूज मिसाइल और ड्रोन पर यह हमला कर सकता है.

चर्चा में क्यों?

रूस को कहा कि कोरोना महामारी की वजह से भारत को एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति में स्वाभाविक तौर पर कुछ देरी होगी। हालांकि भारत और रूस दोनों ही सभी समझौतों के समय पर अमल के लिए प्रतिबद्ध हैं। इससे पहले फरवरी में रूसी फेडरल सर्विस फॉर मिलिट्री-टेक्नीकल कोऑपरेशन के उपनिदेशक व्लादिमीर ड्रोझोव ने कहा था कि रूस 2021 के आखिर तक भारत को एस-400 की आपूर्ति शुरू कर देगा। बता दें कि भारत ने अक्टूबर 2018 में अमेरिकी विरोध के बावजूद रूस से पांच एस-400 प्रणालियों की खरीद का समझौता किया था।