दारचा-पदम-नीमो सड़क हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी के दारचा को कारगिल जिले के जंस्कार के पदम इलाके को जोड़ेगी। दारचा से पदम की दूरी करीब 148 किलोमीटर है। पदम के बाद यह सड़क नीमो के रास्ते लेह मार्ग से जुड़ जाएगी। इस सड़क के बनने से सेना का साजोसामान कारगिल व लेह तक पहुंचाना आसान हो जाएगा। पहले जंस्कार जाने के लिए तीन गुना अधिक सफर करना पड़ता था।

पुराने ट्रैकिंग रूट को पहले मोटरेबल रोड और अब उसे अच्छी सड़क बनाने से मनाली की ओर से पदम पहुंचने का सफर करीब 600 किलोमीटर कम हो जाएगा। इस समय मनाली से लेह होते हुए पदम पहुंचने का सफर करीब 900 किलोमीटर का है।

1999 में कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना ने हाईवे को निशाना बनाकर भारतीय सेना के लिए मुश्किलें पैदा की थीं। कारगिल में ऊंचाई पर बैठा दुश्मन आसानी से हाईवे पर सेना की मूवमेंट को देखने के साथ उसे निशाना बना सकता था। इसलिए सेना इस क्षेत्र में एक सुरक्षित सड़क की जरूरत महसूस कर रही थी। इसके बाद सेना ने लेह और कारगिल तक पहुंचने के लिए अन्य सड़कों के विकल्प तलाशना शुरू किए। इसके फलस्वरूप दारचा-पदम-नीमो सड़क सामने आई।

दारचा-पदम-नीमो सड़क को लेकर जंस्कार और पदम क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलना तय है। पदम के काउंसिलर स्टेंजिन लापका का कहना है कि यह प्रोजेक्ट भाग्य बदलने वाला है। इस सड़क के बनने से पदम में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। जंस्कार के लोगों को भी फायदा होगा। लोग एक ही दिन में आसानी से मनाली पहुंच सकेंगे। इस सड़क के निर्माण की मांग काफी समय से उठाई जा रही थी।

यह सड़क लद्दाख में सीमा की सुरक्षा के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। इसके बनने से लद्दाख में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए भी यह इस सड़क अहम होगी। प्रधानमंत्री द्वारा खुद इस प्रोजेक्ट की निगरानी करने से काम में तेजी आई है।

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