चर्चा में क्यों ?

हाल ही में राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (National Pharmaceuticals Pricing Authority-NPPA) द्वारा 12 आवश्यक दवाओं (Essential Medicines) की कीमतों में 50% की वृद्धि की गई।

राष्ट्रीय औषधि उत्पाद मूल्य प्राधिकरण (NPPA) की स्थापना 29 अगस्त, 1997 को औषधि उत्पाद विभाग (DoP), रासायनिक उत्पाद और उर्वरक मंत्रालय के संलग्न कार्यालय के रूप में की गई थी, ताकि सस्ती कीमतों पर दवाओं की कीमत और उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
एनपीपीए DPCO, 2013 के अनुबंध 1 के तहत बताई गई सभी दवाओं के लिए उच्चतम मूल्य (MRP) प्रदान करता है और इन और अनिर्धारित दवाओं के लिए वार्षिक मूल्य वृद्धि पर भी नज़र रखता है।

यह एक स्वायत्त निकाय है और देश के लिए आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची-NLEM (National List of Essential Medicines) और उत्पादों की कीमतों को नियंत्रित करता है।

कार्य

  • दवा (कीमत नियंत्रण) आदेश के प्रावधनों का क्रियान्वयन करना।
  • दवाओं की उपलब्धता तथा कमी को चिन्हित करना।
  • दवाओं के उप्तादन, आयात, निर्यात, कंपनियों के मार्केट शेयर तथा लाभ को मॉनिटर करना।
  • दवाओं की कीमत के सन्दर्भ में अध्ययन इत्यादि करना।
  • दवा नीति में परिवर्तन अथवा संशोधन के लिए केंद्र सरकार को परामर्श प्रदान करना।

ड्रग मूल्य नियंत्रण आदेश 1995 (DPCO 1995) क्या है ?

DPCO 1995 दवाओं की कीमतों को विनियमित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 के तहत भारत सरकार द्वारा जारी एक आदेश है। आदेश, अन्य चीजों के बीच, नियंत्रित मूल्य दवाओं की एक सूची, दवा की कीमतें निर्धारित करने की प्रक्रिया, सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों के कार्यान्वयन की विधि, प्रावधानों के उल्लंघन के लिए दंड, आदि प्रदान करता है। डीपीसीओ के प्रावधानों को लागू करने के लिए सरकार की शक्तियों को राष्ट्रीय औषधि मूल्य प्राधिकरण में निहित किया जाता है।

दवा (मूल्य नियत्रंण) आदेश, 1995 के किसी भी प्रावधान का उल्लंधन, आवश्यक वस्तुएँ अधिनियम 1995 के प्रावधानों के अनुरूप दण्डनीय है। आवश्यक वस्तुए अधिनियम की धारा 7 के अनुसार औषध (मूल्य नियत्रंण) आदेश के उल्लंधन के लिए न्यूनतम तीन महीने के कारावास के दंड की व्यवस्था है जो सात वर्ष तक के लिए बढ़ सकती है एवं अतिक्रमणकारी जुर्माने का भी पात्र होता है।