बीते दिनों नेपाल सरकार ने अपने देश का नया नक्शा जारी किया था जिसमें उसने लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा के कुल 395 वर्ग किलोमीटर के भारतीय इलाके को अपना बताया था। नेपाल सरकार ने ऐलान किया किया था कि इस नक्शे को अब देश के सभी स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में इस्तेामाल किया जाएगा।

कुछ दिनों पहले भारत द्वारा 17000 फुट की ऊंचाई पर स्थित लिपूलेख दर्रे को उत्तराखंड के धारचूला से जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबें रणनीति सर्कुलर लिंक रोड का उद्घाटन किया गया है। जिसको लेकर नेपाल द्वारा आपत्ति जताई गयी थी।

नेपाल के भू प्रबंधन और सुधार मंत्रालय की ओर से मंत्री पद्मा अरयाल ने इस मौके पर कहा था कि नए नक्शें को संसद के समक्ष रखा जाएगा ताकि उसमें किए गए संशोधनों को मंजूरी दिलाई जा सके।

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उक्त नए नक्शे में भारतीय इलाकों को दिखाए जाने पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए नेपाल को भारत की संप्रभुता का सम्मान करने की नसीहत दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था कि हम नेपाल सरकार से गुजारिश करते हैं कि वह ऐसी बनावटी कार्टोग्राफिक प्रकाशित करने से बचे और भारत की एकता अखंडता का सम्मान करे।

लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा की भौगोलिक अवस्थिति और महत्व

  • लिपुलेख दर्रा कालापानी के निकट सबसे पश्चिमी क्षेत्र है जिसके जरिये प्राचीन काल से 1962 तक व्यापार होता था। 1962 के भारत-चीन युद्ध उपरांत दर्रा बंद कर दिया गया था। इसके अलावा इस दर्रे का प्रयोग कैलाश मानसरोवर यात्रा में भी इस्तेमाल होता रहा है। पुनः1991-92 में में लिपुलेख दर्रे को व्यापारिक मार्ग हेतु खोला गया।
  • लिम्पियाधुरा, कालापानी के सुदूर उत्तर पश्चिम में स्थित एक महत्वपूर्ण इलाका है। आपको बता दें काली नदी के कई उद्गम स्रोत है जिसमें दो प्रमुख धारा हैं। इसमें जहां एक प्रमुख धारा का उद्गम स्थल कालापानी है तो वही दूसरी प्रमुख धारा का एक स्रोत लिम्पियाधुरा है जिसके आधार पर नेपाल क्षेत्र पर दावा प्रस्तुत करता है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में लिम्पियाधुरा दर्रा भी स्थित है जिसके बारे में मान्यता है कि प्राचीन काल में इस रास्ते से तिब्बत से व्यापार होता था।
  • काली नदी का उद्गम स्थल वाले कालापानी 372 वर्ग किलोमीटर में फैला एक मत्वपूर्ण सामरिक इलाका है। इसे भारत-चीन और नेपाल का ट्राई जंक्शन भी कहा जाता है। भारत इसे जहाँ उत्तराखंड के पिथौरागढ़ का हिस्सा मानता वही नेपाल इसे दार्चुला जिले का हिस्सा बताता है।
  • विगत कुछ समय से भारत चीन सीमा पर चीन के द्वारा काफी आक्रामक रवैया अपनाया जा रहा है। इसे हम डोकलाम, पैंगोंग झील, गलवान घाटी इत्यादि के संदर्भ में समझ सकते हैं।चीन हिमालय क्षेत्र में प्रभाव बनाने के लिए अंधाधुंध निर्माण कार्य कर रोड समेत अन्य अवसंरचना का निर्माण कर रहा है, जिससे यहाँ चीनी सेना की पकड़ बहुत मजबूत हो गई है। इसके साथ ही चीन अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए कई सैन्य बंकर समेत अपने लड़ाकू विमान की तैनाती के लिए कई सारे एयर स्ट्रिप भी बना चुका है।
  • चीन-नेपाल के बढ़ते प्रगाढ़ संबंध के बीच चीनी सेना पर नजर रखने एवं सैन्य संतुलन स्थापित करने के लिए इस क्षेत्र का बड़ा ही रणनीतिक महत्व है। इस क्षेत्र से न केवल चीन की गतिविधियों को नजर रखी जा सकती है बल्कि चीनी गतिरोध का माकूल जवाब भी दिया जा सकता है। विगत कुछ वर्षों से भारत लगातार सीमा पर अपनी अवसंरचना को मजबूत कर रहा है जिसमें मुख्य सड़कें समेत एयर स्ट्रिप भी बनाना शामिल है।

नेपाल का दृष्टिकोण?

  • नेपाल सुगौली समझौते (1816) के तहत काली नदी के पूर्वी क्षेत्र, लिंपियादुरा, कालापानी और लिपुलेख पर अपना दावा करता है। इसी आधार पर नेपाल भारतीय उपस्थिति को अवैध बताता है। लिपूलेख दर्रे-धारचूला लिंक रोड के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून के उपरान्त जारी नए राजनीतिक नक्शा पर भी नेपाल ने आपत्ति जताई थी।

सुगौली संधि क्या है?

नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के बीच 1816 में सुगौली संधि हुई थी। इस संधि में तहत काली(महाकाली) नदी के पूरब का इलाका नेपाल का माना गया। इसके अलावा सुगौली संधि के तहत ही गंडक नदी को भारत-नेपाल के बीच की सीमा माना गया है। जहाँ काली नदी के कई धाराओं होने के इसके अलग-अलग उदगम होने से सीमा विवाद को जन्म देती है वही गंडक नदी की धारा का प्रवाह बदलने से भारत और नेपाल सीमा को बढ़ा देती है।उदाहरण के लिए महाकाली नदी दो धाराओं से मिलकर बनती है।

https://en.wikipedia.org/wiki/Treaty_of_Sugauli

जहां इसकी पहली धारा लिपुलेख के उत्तर-पश्चिम में स्थित लिम्पियाधुरा से निकलती है, वहीं इसकी दूसरी धारा लिपुलेख के दक्षिण से निकलती है। नेपाल लिम्पियाधुरा से निकलने वाली धारा को महाकाली नदी का स्त्रोत मानता है और कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को अपना हिस्सा बताता है।दूसरी ओर भारत लिपुलेख के दक्षिण से निकलने वाली धारा को इसकी मुख्यधारा मानता है।

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